रास्ते कहीं खत्म नहीं होते, हम एक बार अपनी मंजिल को छू लें,लेकिन ये भी सच है कि एक रास्ता पार होते ही दूसरी राह बाहें फैलाए हमारा स्वागत करने को तैयार होती है। बस देर इस बात की है कि हम जो मंजिल पा चुके है उसका मोह त्याग कर नए रास्ते को अपना लें...
बुधवार, 28 मार्च 2012
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जब कभी तुम जिंदगी से थक जाओ...
जब कभी तुम जिंदगी से थक जाओ, तो मेरे पास आना... बैठना घड़ी भर को संग, वो तमाम किस्से मुझे फिर से सुनाना. और पूछना मुझसे कि हुआ कुछ ऐस...
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अकसर देखती हूं, राहगीर, नातेरिश्तेदार और यहां तक कि मेरे अपने दोस्तयार... उन्हें घूरघूर कर देखते हैं, उन की एक झलक को लालायित रहते हैं... -...
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जिसे कहने के लिए, तुम्हारा इंतज़ार था, वो बात कहीं छूट गई है। जिसके सिरहाने सर रखकर सोने को मैं, बेकरारा थी, वो रात कहीं टूट गई है। अतृप्त...
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मु्झे देखिए, परखिए और पंसद आने पर चुन लीजिए, आप लगा सकते है मेरी बोली, अरे घबराएं नहीं, यदि आप पुरुष हैं तो कतई नहीं, मेरी बोली आपकी जेब पर ...

5 टिप्पणियां:
बहुत ही बढ़िया।
सादर
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‘जो मेरा मन कहे’ पर आपका स्वागत है
लगभग सात महीने के बाद स्वागत...
नए पोस्ट का...
उम्मीद है सिलसिला जारी रहेगा...
एक अच्छे भाव के लिए बधाई...
२३ अगस्त २०११ के बाद शायद ही कोई दिन रहा होगा जब आपके ब्लॉग पैर विजिट ना किया हो, पर आज फिर से आपकी वापसी पर खुश हूँ कि फिर से शब्दों कि जादूगरी पढ़ने को मिलेगी ! बहुत सुंदर ढंग है आपका अभिव्यक्ति का! धन्यवाद फिर से लौटकर आने का!
२३ अगस्त २०११ के बाद शायद ही कोई दिन रहा होगा जब आपके ब्लॉग पैर विजिट ना किया हो, पर आज फिर से आपकी वापसी पर खुश हूँ कि फिर से शब्दों कि जादूगरी पढ़ने को मिलेगी ! बहुत सुंदर ढंग है आपका अभिव्यक्ति का! धन्यवाद फिर से लौटकर आने का!
shukriya. fir lauti hun. kabhi na jaane ke liye
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